Wednesday, February 15, 2012

पिछले दिनों कर्णाटक विधानसभा में जो अनहोनी हुयी, वह एक दुर्भाग्य है। एक और दुर्भाग्य है कि जिस विरोधी पार्टी सदस्य के इशारे पर यह काम अखबारों और दूरदर्शन की विभिन्न समाचार धाराओं में इस खबर को सरगर्मी से दिखाया गया, उसने केवल यह इसलिए किया की विरोधी दल के सदस्य इसमें शामिल हैं। क्या वे सदन की गरिमा की रक्षा के लिए, वहीँ आपत्ति दिखाते हुए उसे बंद नहीं कर सकते थे? दरअसल, वे ऐसा कर देते तो सबको मसाला कैसे मिलता?
 एक विधायक जो लाखों लोगों के मत पाकर विधानसभा में पहुंचता है, कितना ग़ैर ज़िम्मेदार हो सकता है, ये इस बात का ताज़ा उदाहरण है।
अभी हाल में ही जो कुछ कर्नाटक विधानसभा में घटित हुआ; उसमें ध्यान देनेवाला पहलू यह है कि विपक्षी दल के सदस्य जिसने इस घटना को मीडिया के सामने लाया, वह इसको सदन के अन्दर ही निबटा सकता था। इस घटना से सदन कि गरिमा को नुक्सान हुआ है। जनता के सामने ये बात आने के बाद आम राय यही बनी होगी कि ऐसा सदन में नहीं होना चाहिए था। तब, यहाँ यह महत्त्वपूर्ण है कि सदन में ये पर्याप्त व्यवस्था हो कि सभी विधायक गरिमा के अनुरूप व्यवहार करें, न कि आम जन का मुद्दा बन जाएँ।
                                                                  फैसला आप पर!

Wednesday, September 29, 2010

धरोहर!

 दैनिक भास्कर में एक दैनिक स्तम्भ है-आज की ट्वीट| २० अगस्त को इसी स्तम्भ में प्रख्यात अभिनेता अनुपम खेर की अभिव्यक्ति प्रकाशित हुई जो    विचार-मीमांसा करने को प्रेरित करती है| आजकल संघर्ष से वंचित सुख में पल रहे बचपन को लक्ष्य करके यह बात कही:

Friday, September 24, 2010

विचार-मीमांसा!: मेहनत !

विचार-मीमांसा!: मेहनत !: "'हम अच्छी मेहनत करेंगे, इस विश्वास के साथ कि जो भी फसल होगी, भरपूर होगी! उसका दाना-दाना संसार की भूख मिटाने में सक्षम होगा! हम ऐ..."

विचार-मीमांसा!: अब्दुल कलाम के विचार!

विचार-मीमांसा!: अब्दुल कलाम के विचार!: "अभी हाल ही में, मुझे मेरे मित्र का इलेक्ट्रॉनिक-संदेश मिला जिसमें पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम के एक लेख की प्रति थी लेख में जो कहा गया था ..."

विचार-मीमांसा!: ये हमारे हुक्मरान!

विचार-मीमांसा!: ये हमारे हुक्मरान!: "जब शक्ति प्राप्त करने की बात होती है तो लोग मूँछों पर ताव देते हुए, बल का प्रदर्शन करते हैं दोनों हाथ जोड़कर नम्रता और विनय की मूर्ति बनते ..."

Monday, August 30, 2010

फैसला आप पर!

कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं होता| ऐसे ही किसी भी देश की प्रतिष्ठा अपने आप नहीं बनती| उस देश के रहने वाले लोगों पर निर्भर होता है कि वे देश को कैसा बनाना चाहते हैं| नागरिकों के चरित्र से ही देश का चरित्र बनता है| देश का शासक भी देश की जनता का ही मुखड़ा होता है| इसलिए ही यह कहा जाता है कि प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्यों का निर्वाह भलीभाँति करना चाहिए| शुरुआत हमको ही करनी है, उत्तरदायित्व हमको ही निभाना है| फैसला आप पर!