कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं होता| ऐसे ही किसी भी देश की प्रतिष्ठा अपने आप नहीं बनती| उस देश के रहने वाले लोगों पर निर्भर होता है कि वे देश को कैसा बनाना चाहते हैं| नागरिकों के चरित्र से ही देश का चरित्र बनता है| देश का शासक भी देश की जनता का ही मुखड़ा होता है| इसलिए ही यह कहा जाता है कि प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्यों का निर्वाह भलीभाँति करना चाहिए| शुरुआत हमको ही करनी है, उत्तरदायित्व हमको ही निभाना है| फैसला आप पर!
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