पिछले दिनों कर्णाटक विधानसभा में जो अनहोनी हुयी, वह एक दुर्भाग्य है। एक और दुर्भाग्य है कि जिस विरोधी पार्टी सदस्य के इशारे पर यह काम अखबारों और दूरदर्शन की विभिन्न समाचार धाराओं में इस खबर को सरगर्मी से दिखाया गया, उसने केवल यह इसलिए किया की विरोधी दल के सदस्य इसमें शामिल हैं। क्या वे सदन की गरिमा की रक्षा के लिए, वहीँ आपत्ति दिखाते हुए उसे बंद नहीं कर सकते थे? दरअसल, वे ऐसा कर देते तो सबको मसाला कैसे मिलता?
एक विधायक जो लाखों लोगों के मत पाकर विधानसभा में पहुंचता है, कितना ग़ैर ज़िम्मेदार हो सकता है, ये इस बात का ताज़ा उदाहरण है।
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