Wednesday, September 29, 2010

धरोहर!

 दैनिक भास्कर में एक दैनिक स्तम्भ है-आज की ट्वीट| २० अगस्त को इसी स्तम्भ में प्रख्यात अभिनेता अनुपम खेर की अभिव्यक्ति प्रकाशित हुई जो    विचार-मीमांसा करने को प्रेरित करती है| आजकल संघर्ष से वंचित सुख में पल रहे बचपन को लक्ष्य करके यह बात कही:
अपने बचपन में हमें जो नहीं मिला, अपने बच्चों को 'वह सब' देने की चिंता में हम 'वह' देना भूल जाते हैं; "जो" हमें बचपन में मिला था| इसके बारे में सोचिये|
 मैं आपसे इस बारे में पुरजोर अपील करता हूँ की आप अपने बच्चों की परवरिश पर ध्यान दें| ये वो धरोहर है जो आप , अपने बाद इस संसार को देकर जायेंगे| फ़ैसला आप पर!

5 comments:

  1. बहुत खूब!
    Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'
    dr.purushottammeena@yahoo.in

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  2. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  3. इस सुंदर से चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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